Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 894
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1ऊधो ने कहा पुनि गोविंद राधे।
2आप दोनों धन्य धन्य हैं बता दे॥ 10426॥
3जो पूर्ण ब्रह्म को गोविंद राधे।
4सुत मानि करें अनुराग बता दे॥ 10427॥
5बलराम श्याम तो गोविंद राधे।
6हैं पुरुषोत्तम ब्रह्म बता दे॥ 10428॥
7सम्पूर्ण विश्व के गोविंद राधे।
8निमित्तोपादान हेतु बता दे॥ 10429॥
9ये ही हैं जीवों के गोविंद राधे।
10भीतर जीवनदाता बता दे॥ 10430॥
11कृष्ण भगवान ही गोविंद राधे।
12सब की आत्मा प्रिय हैं बता दे॥ 10431॥
13भक्त हित कृष्ण का गोविंद राधे।
14बार बार हो अवतार बता दे॥ 10432॥
15आप दोनों का गोविंद राधे।
16उनके प्रति पुत्रभाव है बता दे॥ 10433॥
17अतएव आप दोनों गोविंद राधे।
18हो गये अब कृतकृत्य बता दे॥ 10434॥
19थोड़े ही दिन में गोविंद राधे।
20राम श्याम आयेंगे ब्रज में बता दे॥ 10435॥
21सबको ही पूर्ववत् गोविंद राधे।
22प्रेमानन्द भी देंगे बता दे॥ 10436॥
23कंस को मार कर गोविंद राधे।
24कहा था आवूँगा ब्रज में बता दे॥ 10437॥