Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 893
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1दस हजार हाथी गोविंद राधे।
2बल वाला था कंस असुर बता दे॥ 10414॥
3दोनों पहलवानों को गोविंद राधे।
4कुबलयापीड को मारा बता दे॥ 10415॥
5जैसे हाथी गोविंद राधे।
6साधारण छड़ी तोड़े बता दे॥ 10416॥
7ऐसे धनुष को गोविंद राधे।
8श्रीकृष्ण ने तोड़ डाला बता दे॥ 10417॥
9उसी मेरे लाल ने गोविंद राधे।
10सात दिन उठाये रखा गिरि को बता दे॥ 10418॥
11प्रलम्ब धेनुक गोविंद राधे।
12अरिष्ट आदि को मारा बता दे॥ 10419॥
13इमि सुधि करि करि गोविंद राधे।
14नंद जी बेसुध हो गये बता दे॥ 10420॥
15वाणी भई बन्द गोविंद राधे।
16कंठ भी गदगद हो गया बता दे॥ 10421॥
17यशोदारानी भी गोविंद राधे।
18नंद की बात सुन रही थीं बता दे॥ 10422॥
19उनके भी नेत्रों ते गोविंद राधे।
20बह चली थी अश्रुधार बता दे॥ 10423॥
21प्रेम की बाढ़ ते गोविंद राधे।
22स्तनों ते बहा दूध भी बता दे॥ 10424॥
23नन्द यशोदा प्रेम गोविंद राधे।
24लखि ऊधो भये मुग्ध बता दे॥ 10425॥