Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 890
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1सूर्यास्त होते ही गोविंद राधे।
2पहुँचे नंद के भवन बता दे॥ 10378॥
3उस समय वन ते गोविंद राधे।
4लौट रही थीं गैयाँ बता दे॥ 10379॥
5गोखुर धूलि ते गोविंद राधे।
6ऊधो का रथ ढक गया बता दे॥ 10380॥
7बछड़ों ते मिलने को गोविंद राधे।
8गायें भागी जा रहीं बता दे॥ 10381॥
9बछड़ों के प्यार ते गोविंद राधे।
10गायें दूध गिरा रही थीं बता दे॥ 10382॥
11कृष्ण के अनुचर गोविंद राधे।
12उद्धव ते मिले नंद बता दे॥ 10383॥
13नंद को अपार सुख गोविंद राधे।
14मिला ऊधो के मिलन ते बता दे॥ 10384॥
15ऊधो को लगाया उर गोविंद राधे।
16मानो कृष्ण ही मिलि गये हों बता दे॥ 10385॥
17भोजन कराया पुनि गोविंद राधे।
18छप्पन व्यंजन प्यार ते बता दे॥ 10386॥
19पूछा नंद बाबा ने गोविंद राधे।
20वसुदेव मेरे सखा हैं बता दे॥ 10387॥
21अब तो वे छूट गये गोविंद राधे।
22कंस के कारागार ते बता दे॥ 10388॥
23वसुदेव देवकी गोविंद राधे।
24अब तो कुशल ते हैं ना बता दे॥ 10389॥