Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 889
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1ऊधो ब्रज जावो गोविंद राधे।
2वहाँ मेरे मैया बाबा बता दे॥ 10366॥
3नंदराय बाबा हैं गोविंद राधे।
4मैया मेरी यशोदा बता दे॥ 10367॥
5मेरे वियोग में गोविंद राधे।
6अत्यन्त हो रहे दुखी वे बता दे॥ 10368॥
7वहाँ गोपियाँ हैं गोविंद राधे।
8जिनका प्राण मैं ही हूँ बता दे॥ 10369॥
9मेरे कारण गोविंद राधे।
10लोक वेद कानि तजि दीनी बता दे॥ 10370॥
11मेरी प्रतिज्ञा है गोविंद राधे।
12प्रणत की रक्षा करूँ मैं बता दे॥ 10371॥
13मैं उन गोपियों का गोविंद राधे।
14परम प्रियतम आत्मा हूँ बता दे॥ 10372॥
15मेरे चले आने ते गोविंद राधे।
16वे सब अति व्याकुल हैं बता दे॥ 10373॥
17मेरा स्मरण करि गोविंद राधे।
18वे बार बार मुर्छित हों बता दे॥ 10374॥
19मैंने कहा था ऊधो गोविंद राधे।
20आवूँगा पुनि ब्रज में बता दे॥ 10375॥
21वहाँ जाके ऊधो गोविंद राधे।
22उन्हें ज्ञान योग का ज्ञान करा दे॥ 10376॥
23कृष्ण आदेश पाके गोविंद राधे ।
24ऊधो तुरत बैठे रथ में बता दे॥ 10377॥