Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 888
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1कृष्ण संग गोपियों ने गोविंद राधे।
2ब्राह्मी रात्रियाँ क्षणार्ध ज्यों बिता दे॥ 10354॥
3सोइ बिनु कृष्ण अब गोविंद राधे।
4एक एक पल जनु कल्प बिता दे॥ 10355॥
5आया है बसन्त सखि गोविंद राधे।
6आयेंगे बसन्त पै कन्त बता दे॥ 10356॥
7आये न बसन्त को भी गोविंद राधे।
8कैसे रहा गया कन्त ते बता दे॥ 10357॥
9आके बसंत सखि गोविंद राधे।
10और दुःख दे बिनु कन्त बता दे॥ 10358॥
11आके बसंत सखि गोविंद राधे।
12कंत बिनु मेरा प्राणान्त करा दे॥ 10359॥
13कंत नाहिं आए सखि गोविंद राधे।
14आया बसंत अंतक ज्यों बता दे॥ 10360॥
15काल की गति देखो गोविंद राधे।
16रास रस दै के बनवास करा दे॥ 10361॥
17राजमद देखा सखि गोविंद राधे।
18छाछ दै नचाया जेहि सोइ भुला दे॥ 10362॥
19बृहस्पति के शिष्य गोविंद राधे।
20परमज्ञानी उद्धव थे बता दे॥ 10363॥
21कृष्ण के सखा भी गोविंद राधे।
22कृष्ण के मंत्री भी थे बता दे॥ 10364॥
23एक दिन कृष्ण ने गोविंद राधे।
24कहा ऊधो सुनो बात बता दे॥ 10365॥