Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 887
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1जलनिधि कुक्षि है गोविंद राधे।
2वायु ही है प्राण शक्ति बता दे॥ 10347॥
3समस्त तरुवर गोविंद राधे।
4हैं आपके रोम रोम बता दे॥ 10348॥
5मेघ हैं सिर केश गोविंद राधे।
6पर्वत अस्थिसमूह बता दे॥ 10349॥
7दिन अरु रात है गोविंद राधे।
8पलक उठाना गिराना बता दे॥ 10350॥
9लीलाधारी आप गोविंद राधे।
10बार बार लें अवतार बता दे॥ 10351॥
11जीव कल्याण हित गोविंद राधे ।
12रसमयी करें लीलायें बता दे॥ 10352॥
13और भी बहुविधि गोविंद राधे।
14अस्तुति की अक्रूर ने बता दे॥ 10353॥