Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 886
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1कंस दूत बनना भी गोविंद राधे।
2मो को हुआ वरदान बता दे॥ 10335॥
3पुनि सावधान हो के गोविंद राधे।
4कर जोरि कीनी अस्तुति बता दे॥ 10336॥
5समस्त कारणों के गोविंद राधे।
6आप हो कारण कृष्ण बता दे॥ 10337॥
7प्रकृति महान आदि गोविंद राधे।
8आपके हैं सब अंग बता दे॥ 10338॥
9प्रकृति प्रकृतिजात गोविंद राधे।
10सब हैं पदार्थ अनात्मा बता दे॥ 10339॥
11अतएव जड़ हैं गोविंद राधे।
12आप को न जानि सकें कबहूँ बता दे॥ 10340॥
13ब्रह्मलोक पर्यन्त गोविंद राधे।
14प्रकृति का आधिपत्य बता दे॥ 10341॥
15आप इन सब ते ही गोविंद राधे।
16रहते अतीत निर्लिप्त बता दे॥ 10342॥
17आप का मुख अग्नि गोविंद राधे।
18आप का चरण है पृथ्वी बता दे॥ 10343॥
19आपके नेत्र तो गोविंद राधे।
20सूर्य अरु चन्द्र हैं दोनों बता दे॥ 10344॥
21आकाश नाभि है गोविंद राधे।
22दसों दिशायें कान हैं बता दे॥ 10345॥
23आपका सिर स्वर्ग गोविंद राधे।
24देवेन्द्र गण हैं भुजायें बता दे॥ 10346॥