Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 885
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1आजानुभुज श्याम गोविंद राधे।
2नटवर भेष अनूप बता दे॥ 10323॥
3वक्षःस्थल श्री गोविंद राधे।
4अँग अँग भूषन भूषित बता दे॥ 10324॥
5शंख चक्र गदा पद्म गोविंद राधे।
6चार कर में श्याम धारे बता दे॥ 10325॥
7श्रीवत्स वक्षःस्थल गोविंद राधे।
8गल गुंज मणि वनमाल बता दे॥ 10326॥
9कौस्तुभ मणि की गोविंद राधे।
10प्रभा ही है श्रीवत्स बता दे॥ 10327॥
11विधि हरि हर सुर गोविंद राधे।
12वेदों ते करें अस्तुति बता दे॥ 10328॥
13अनन्त शक्तियाँ गोविंद राधे।
14कर रहीं श्याम की सेवा बता दे॥ 10329॥
15यह दिव्य झाँकी लखि गोविंद राधे।
16अक्रूर हो गये मग्न बता दे॥ 10330॥
17सात्विक भावों का गोविंद राधे।
18तनु में हुआ उद्रेक बता दे॥ 10331॥
19आये जल बाहर गोविंद राधे।
20किया श्याम राम को प्रणाम बता दे॥ 10332॥
21अक्रूर जानि गये गोविंद राधे।
22श्याम बलराम हैं ब्रह्म बता दे॥ 10333॥
23कोइ बड़भागी ही गोविंद राधे।
24दिव्य स्वरूप यह देखे बता दे॥ 10334॥