Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 883
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1भोर भई अक्रूर गोविंद राधे।
2चले संग लै श्याम राम को बता दे॥ 10299॥
3नन्द आदि बूढ़े गोप गोविंद राधे।
4भेंट लै लै चले साथ बता दे॥ 10300॥
5बैठे छकड़े पै गोविंद राधे।
6छकड़े चले सब मथुरा बता दे॥ 10301॥
7उसी समय गोपियाँ गोविंद राधे।
8गईं प्राणधन पास बता दे॥ 10302॥
9श्याम को लखि कछु गोविंद राधे।
10धीरज बँध्यो भइँ शान्त बता दे॥ 10303॥
11गोपियाँ सोचें मन गोविंद राधे।
12श्याम कछु संदेश देंगे बता दे॥ 10304॥
13श्याम ने कहा मैं गोविंद राधे।
14शीघ्र ही पुनि आवूँगो बता दे॥ 10305॥
15रथ चला मथुरा को गोविंद राधे।
16उड़ी धूल रथ के पाछे बता दे॥ 10306॥
17जहँ लौं दिखी धूल गोविंद राधे।
18गोपियाँ खड़ी रहीं देखती बता दे॥ 10307॥
19वायु के समान वेग गोविंद राधे।
20रथ के घोड़ों का था बता दे॥ 10308॥
21थोड़ी ही देर में गोविंद राधे।
22पहुँचे यमुना तट पै बता दे॥ 10309॥
23सब ने पिया जल गोविंद राधे।
24पुनि बैठे राम श्याम रथ पै बता दे॥ 10310॥