Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 882
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1जिन सँग रास में गोविंद राधे।
2ब्राह्म रात्रियाँ बीतीं क्षण में बता दे॥ 10287॥
3उनके बिना अब गोविंद राधे।
4पल भर भी कैसे कटेगा बता दे॥ 10288॥
5प्रतिदिन साँझ को गोविंद राधे।
6गाय चरा के लौटते थे बता दे॥ 10289॥
7तब लखि श्याम छवि गोविंद राधे।
8मन प्राण होते थे मुग्ध बता दे॥ 10290॥
9धूसरि धूरि भरा गोविंद राधे।
10तनु हम सब देखें थीं बता दे॥ 10291॥
11काँधे कामरि गोविंद राधे।
12लट घुँघुरारी कारी बता दे॥ 10292॥
13मुरली मधुर धुनि गोविंद राधे।
14छेड़ते आते श्याम बता दे॥ 10293॥
15संग में बलराम गोविंद राधे।
16धनसुख मनसुख सखा भी बता दे॥ 10294॥
17सब भइँ बेसुध गोविंद राधे।
18तजि दइ लोक वेद कानि बता दे॥ 10295॥
19उच्च स्वर क्रन्दन गोविंद राधे।
20करने लगीं सब गोपियाँ बता दे॥ 10296॥
21गोविंद माधव गोविंद राधे।
22दामोदर कहि टेरें बता दे॥ 10297॥
23रोते रोते गोविंद राधे।
24बीत गई सब रात बता दे॥ 10298॥