Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 881
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1मथुरा की नारियाँ तो गोविंद राधे।
2कालि लखि धन्य धन्य होंगी बता दे॥ 10275॥
3निज सौन्दर्य ते ही गोविंद राधे।
4वे श्याम को मोह लेंगी बता दे॥ 10276॥
5मार्ग में जो भी जन गोविंद राधे।
6श्याम को देखेंगे धन्य हों बता दे॥ 10277॥
7अरी ब्रज गोपियों गोविंद राधे।
8अक्रूर कितना क्रूर है बता दे॥ 10278॥
9हम सब के आगे गोविंद राधे।
10श्याम को ले जा रहा है बता दे॥ 10279॥
11दो बात कह कर गोविंद राधे।
12धीरज भी न बँधाये बता दे॥ 10280॥
13ऐसे क्रूर का गोविंद राधे।
14नाम अक्रूर क्यों रखा है बता दे॥ 10281॥
15श्याम भी निठुर भये गोविंद राधे।
16मुस्कुराते चले जा रहे बता दे॥ 10282॥
17देखो देखो सखि गोविंद राधे।
18श्याम बैठ भी गये रथ पै बता दे॥ 10283॥
19मतवाले गोपगण गोविंद राधे।
20हँसते हुये जा रहे हैं बता दे॥ 10284॥
21चलो हम सब ही गोविंद राधे।
22रोकें निज प्राणनाथ को बता दे॥ 10285॥
23ब्रज के बड़े बूढ़े गोविंद राधे।
24क्या कर लेंगे हमारा बता दे॥ 10286॥