Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 879
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1किसी गोपी की गोविंद राधे।
2आँख ते बहे अश्रुधार बता दे॥ 10251॥
3किसी गोपी के गोविंद राधे।
4ध्यान में कान्ह मुसकान बता दे॥ 10252॥
5किसी गोपी के गोविंद राधे।
6ध्यान में मतवारी चाल बता दे॥ 10253॥
7किसी गोपी के गोविंद राधे।
8ध्यान में नैनन बान बता दे॥ 10254॥
9किसी गोपी के गोविंद राधे।
10ध्यान में रसीले दृगन बता दे॥ 10255॥
11सभी ब्रज गोपियाँ गोविंद राधे।
12भइँ पूर्व लीला में मग्न बता दे॥ 10256॥
13पुनि विरह ज्वाला में गोविंद राधे।
14जलने लगीं सब गोपियाँ बता दे॥ 10257॥
15पुनि मिलि गोपियाँ गोविंद राधे।
16कोसने लगी थीं ब्रह्मा को बता दे॥ 10258॥
17तुम हो विधाता किन्तु गोविंद राधे।
18तोहिं न कछु आता जाता बता दे॥ 10259॥
19जब तो को ज्ञात था गोविंद राधे।
20हमको मिलेंगे श्याम बता दे॥ 10260॥
21तो फिर तुमने गोविंद राधे।
22ऐसा वियोग दुख लिखा क्यों बता दे॥ 10261॥
23सब गुण तुममें हैं गोविंद राधे।
24किन्तु करु णा का ना लेश बता दे॥ 10262॥