Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 876
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1कृष्ण की लीला तो गोविंद राधे।
2दिव्य जीव कल्याण हित है बता दे॥ 10215॥
3उनकी लीला का गोविंद राधे।
4स्मरण कीर्तन शुद्ध बना दे॥ 10216॥
5ब्रजवासियों की तो गोविंद राधे।
6कृष्ण प्रति द्वेष बुद्धि थी ना बता दे॥ 10217॥
7कृष्ण योगमाया ते गोविंद राधे।
8पतियों ने माना नारी पास है बता दे॥ 10218॥
9ब्रह्मा की रात्रि सम गोविंद राधे।
10रास रस की रात्रि बीती बता दे॥ 10219॥
11गोपियों की इच्छा गोविंद राधे।
12घर लौट जाने की थी ना बता दे॥ 10220॥
13श्रीकृष्ण आज्ञा ते गोविंद राधे।
14सब गोपियाँ घर लौटीं बता दे॥ 10221॥
15श्रीकृष्ण आज्ञा को गोविंद राधे।
16गोपियाँ सेवा माने थीं बता दे॥ 10222॥
17हरि जन्य सुख अरु गोविंद राधे।
18हरि जन्य दुख हो अनन्त बता दे॥ 10223॥
19कृष्ण मिलन में ज्यों गोविंद राधे।
20सुख मिले दिव्य अनन्त बता दे॥ 10224॥
21कृष्ण विरह में त्यों गोविंद राधे।
22दुख मिले उतना अनन्त बता दे॥ 10225॥
23हरि योगमाया तो गोविंद राधे।
24हरि दर्शन सुख सहन करा दे॥ 10226॥