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Radha Govind Geet Part 2

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

लीला माधुरी · पृष्ठ 875

Reading 373 of 452 · Source nos. 10203–10214 · Source PDF 378

1सर्वसमर्थ कृष्ण गोविंद राधे।

2पूर्ण ब्रह्म भगवान वेद बता दे॥ 10203॥

3पुनि उनके प्रति गोविंद राधे।

4ऐसा संदेह महामूर्खता बता दे॥ 10204॥

5जिन पद रज ते ही गोविंद राधे।

6भक्त हो जायें कृतकृत्य बता दे॥ 10205॥

7जिनके संयोग ते ही गोविंद राधे।

8योगी हों बंधनमुक्त बता दे॥ 10206॥

9जिनके विज्ञान ते ही गोविंद राधे।

10ज्ञानी हो जायँ ब्रह्मरूप बता दे॥ 10207॥

11भक्त योगी ज्ञानी ही गोविंद राधे।

12पाप पुण्य ते हों अतीत बता दे॥ 10208॥

13उन भक्तादिकों को गोविंद राधे।

14वेद के विधि निषेध पाल्य ना बता दे॥ 10209॥

15वे सब मायातीत गोविंद राधे।

16याते कर्मबन्ध में बँधें ना बता दे॥ 10210॥

17पुनि श्रीकृष्ण प्रति गोविंद राधे।

18ऐसा संदेह आश्चर्य बता दे॥ 10211॥

19गोपी या गोपीपति गोविंद राधे।

20सब की ही आत्मा हैं कृष्ण बता दे॥ 10212॥

21सबके हैं साक्षी कृष्ण गोविंद राधे।

22सबके हैं माता पिता पति भी बता दे॥ 10213॥

23दिव्य चिन्मय तनु गोविंद राधे।

24धरि करें नर जनु लीला बता दे॥ 10214॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 2 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers continue at 5902 and end at 11111. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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