लोड हो रहा है…लोड हुँदैछ…
Skip to main content
Radha Govind Geet Part 2

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

लीला माधुरी · पृष्ठ 873

Reading 371 of 452 · Source nos. 10179–10190 · Source PDF 376

1राजा परीक्षित ने गोविंद राधे।

2पूछा शुक ते प्रश्न बता दे॥ 10179॥

3कृष्ण भगवान भी हैं गोविंद राधे।

4अवतार हेतु भी दो हैं बता दे॥ 10180॥

5धर्म की स्थापना गोविंद राधे।

6अधर्म का नाश हेतु दो हैं बता दे॥ 10181॥

7धर्म मर्यादा के गोविंद राधे।

8निर्माता भी हैं कृष्ण ही बता दे॥ 10182॥

9धर्मोपदेशक भी गोविंद राधे।

10धर्म के रक्षक भी कृष्ण हैं बता दे॥ 10183॥

11पुनि उन कृष्ण ने गोविंद राधे।

12धर्म विरु द्ध किया कार्य क्यों बता दे॥ 10184॥

13कृष्ण पूर्णकाम पुनि गोविंद राधे।

14क्यों किया रास परनारिन बता दे॥ 10185॥

15हे गुरुदेव मम गोविंद राधे।

16मेरा संदेह दूर कीजिए बता दे॥ 10186॥

17शुकदेव ने कहा गोविंद राधे।

18सुनो परीक्षित राजा बता दे॥ 10187॥

19समर्थ लोगों के गोविंद राधे।

20अधर्म कर्म दोषरूप ना बता दे॥ 10188॥

21अग्नि समर्थ जैसे गोविंद राधे।

22सब खा ले रहे शुद्ध बता दे॥ 10189॥

23सूर्य समर्थ जैसे गोविंद राधे।

24सब सोखे रहे शुद्ध बता दे॥ 10190॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 2 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers continue at 5902 and end at 11111. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

Source edition and PDF · Text version