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Radha Govind Geet Part 2

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

लीला माधुरी · पृष्ठ 870

Reading 368 of 452 · Source nos. 10143–10154 · Source PDF 373

1उपपति सेवा ते गोविंद राधे।

2नारी को मिले नाहिं स्वर्ग बता दे॥ 10143॥

3जग में हो अपयश गोविंद राधे।

4जार सेवा है निन्दनीय बता दे॥ 10144॥

5कृष्ण ने परीक्षा ली गोविंद राधे।

6जग आसक्ति है या ना बता दे॥ 10145॥

7इस परीक्षा में भी गोविंद राधे।

8गोपियाँ हुईं उत्तीर्ण बता दे॥ 10146॥

9कृष्ण ने कहा समझा गोविंद राधे।

10ब्रह्म भाव ते पास आइ हो बता दे॥ 10147॥

11निज घर जा जा के गोविंद राधे।

12स्मरण कीर्तन ते प्रेम बढ़ा दे॥ 10148॥

13इष्ट के पास कम गोविंद राधे।

14दूर प्रेम अतिशय होय बता दे॥ 10149॥

15गोपियाँ जानती थीं गोविंद राधे।

16कृष्ण सब की हैं आत्मा बता दे॥ 10150॥

17बड़े बड़े ज्ञानी योगी गोविंद राधे।

18कृष्ण ते ही करें नित प्रेम बता दे॥ 10151॥

19आँखों में आँसू भरि गोविंद राधे।

20बोलीं गोपियाँ सुनो प्रियतम बता दे॥ 10152॥

21तुम सर्वव्यापक गोविंद राधे।

22ऐसे कठोर शब्द कहो ना बता दे॥ 10153॥

23हम सब भुक्ति मुक्ति गोविंद राधे।

24तजि आईं हैं तव शरण बता दे॥ 10154॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 2 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers continue at 5902 and end at 11111. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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