Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 869
Reading 367 of 452 · Source nos. 10131–10142 · Source PDF 372
1प्रथम परीक्षा में गोविंद राधे।
2सब गोपियाँ भईं सफल बता दे॥ 10131॥
3किंतु इस परीक्षा में गोविंद राधे।
4ऋषि पत्नियाँ हुइँ असफल बता दे॥ 10132॥
5ऋषि पत्नियाँ लौटीं गोविंद राधे।
6किन्तु गोपियाँ नहिं लौटीं बता दे॥ 10133॥
7अच्छा अब समझा गोविंद राधे।
8वृन्दावन शोभा लखि आईं बता दे॥ 10134॥
9अब दृश्य देख चुकीं गोविंद राधे।
10घर लौटि सेवा करो पति की बता दे॥ 10135॥
11देखो तुम्हारे शिशु गोविंद राधे।
12गो वत्स भी रोते होंगे बता दे॥ 10136॥
13तुमने दृश्य देख लिया गोविंद राधे।
14गायों का दूध दुहो जाके बता दे॥ 10137॥
15तुम सब सती नारी गोविंद राधे।
16सती धर्म पति की है सेवा बता दे॥ 10138॥
17फिर भी न बोलीं कछु गोविंद राधे।
18मुख करि नीचे खड़ीं गोपी बता दे॥ 10139॥
19कृष्ण ने कहा अच्छा गोविंद राधे।
20मम सौन्दर्यमुग्ध आइ हो बता दे॥ 10140॥
21किन्तु है तुम्हारा धर्म गोविंद राधे।
22पति पुत्रादि की सेवा बता दे॥ 10141॥
23वृद्ध अज्ञ रोगी आदि गोविंद राधे।
24निष्पाप पति भी है सेव्य बता दे॥ 10142॥