Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 868
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1मधुर मुरली धुनि गोविंद राधे।
2सम्पूर्ण विश्व में फैली बता दे॥ 10119॥
3वह थी मुरलि धुनि गोविंद राधे।
4रास में बुलाने की घंटी बजा दे॥ 10120॥
5किन्तु विश्व भर में ही गोविंद राधे।
6सुना बस अधिकारियों ने बता दे॥ 10121॥
7गोपियाँ ही रास की थीं गोविंद राधे।
8अधिकारिणी सुनि भागीं बता दे॥ 10122॥
9मुरली की धुनि मानो गोविंद राधे।
10चुम्बक ब्रज गोपी लोहा बता दे॥ 10123॥
11अस्तु अधिकारी गोपी गोविंद राधे।
12सब गइ थीं कृष्ण निकट बता दे॥ 10124॥
13कृष्ण ने कहा स्वागत गोविंद राधे।
14कहो क्या सेवा करें सब की बता दे॥ 10125॥
15ब्रज में कुशल तो है गोविंद राधे।
16रात में आने का कारण बता दे॥ 10126॥
17सम्प्रति रात्रि तो गोविंद राधे।
18हिंसक जन्तुओं ते युक्त बता दे॥ 10127॥
19याते सब लौट जावो गोविंद राधे।
20देर तक रु कना ना उचित बता दे॥ 10128॥
21तुम्हरे तात मात गोविंद राधे।
22सुत भ्रात पति ढूँढें तोहिं बता दे॥ 10129॥
23कृष्ण ने परीक्षा ली गोविंद राधे।
24गोपी प्रेम घर में है या ना बता दे॥ 10130॥