Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 867
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1कोइ उबलता दूध गोविंद राधे।
2तजि भागी बेसुध हो के बता दे॥ 10107॥
3असन परोसना गोविंद राधे।
4तजि भाजी सुनि मुरली बता दे॥ 10108॥
5दूध पिलाती सुत गोविंद राधे।
6भूमि डारि भाजी समाधि में बता दे॥ 10109॥
7पति की सेवा तजि गोविंद राधे।
8सुनि भाजी धुनि मुरली बता दे॥ 10110॥
9एक दृग अंजन गोविंद राधे।
10भागी बिनु अंजन दूसरी बता दे॥ 10111॥
11निज निज कर्म तजि गोविंद राधे।
12भागीं सब गोपी श्रीकृष्ण ढिंग बता दे॥ 10112॥
13पति पिता सास आदि गोविंद राधे।
14चाहा रोकना नाहिं रुकीं वे बता दे॥ 10113॥
15भूषण वसन सब गोविंद राधे।
16उलटे पहिरि सब भागीं बता दे॥ 10114॥
17पैर का भूषण गोविंद राधे।
18हाथ में डाला अरु भागीं बता दे॥ 10115॥
19हाथ का भूषण गोविंद राधे।
20कान में डाला अरु भागीं बता दे॥ 10116॥
21गोपियों के मन को तो गोविंद राधे।
22पूर्व हरि ने ही हरि लिया था बता दे॥ 10117॥
23रास के पूर्व जब गोविंद राधे।
24कृष्ण ने वंशी बजाई बता दे॥ 10118॥