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Radha Govind Geet Part 2

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

लीला माधुरी · पृष्ठ 860

Reading 358 of 452 · Source nos. 10023–10034 · Source PDF 363

1महल के भीतर गोविंद राधे।

2क्या हो रहा है महली बता दे॥ 10023॥

3रास परमांतरंग गोविंद राधे।

4इसका रहस्य जाने महली बता दे॥ 10024॥

5युगल कृपापात्र गोविंद राधे।

6सुने या सुनाये रासलीला बता दे॥ 10025॥

7रासलीला हैं दो गोविंद राधे।

8अभिसार अरु छद्म लीला बता दे॥ 10026॥

9“भगवानपि ता रात्रीः” गोविंद राधे।

10श्लोक है विरोध द्योतन में बता दे॥ 10027॥

11भगवद्भक्त जन गोविंद राधे।

12आत्माराम होते हैं बता दे॥ 10028॥

13फिर भगवान में तो गोविंद राधे।

14नित्य अनन्त भग छे हैं बता दे॥ 10029॥

15रमण की इच्छा तो गोविंद राधे।

16मायाबद्घ में ही होती है बता दे॥ 10030॥

17रमणकर्ता भी हो गोविंद राधे।

18भगवान भी हो है विरोधी बता दे॥ 10031॥

19“अप्राणो ह्यमनाः” गोविंद राधे।

20मंत्रभाव ब्रह्म मनरहित बता दे॥ 10032॥

21फिर भी रमण हित गोविंद राधे।

22हरि ने बनाया मन दिव्य बता दे॥ 10033॥

23वस्तुतस्तु मन बिनु गोविंद राधे।

24रमण हो ही नाहिं सकता बता दे॥ 10034॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 2 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers continue at 5902 and end at 11111. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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