Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 859
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1पाँचे भूले देह सुधि गोविंद राधे।
2ऐसी भूमिका में तनु सुधि बिसरा दे॥ 10011॥
3छठी दशा रास की है गोविंद राधे।
4ऐसी दशा में रास दर्शन करा दे॥ 10012॥
5दिव्य रसों का सार गोविंद राधे।
6श्यामा श्याम संग गोपी रास बता दे॥ 10013॥
7लीला की मुकुट मनि गोविंद राधे।
8सेवा कुंज की रास लीला बता दे॥ 10014॥
9देहाभिमानी का गोविंद राधे।
10रास लीला श्रवण पतन करा दे॥ 10015॥
11देहाभिमानी का गोविंद राधे।
12रास लीला मनन पतन करा दे॥ 10016॥
13मन दिव्य होने पै गोविंद राधे।
14दिव्य रास श्रवण मनन करा दे॥ 10017॥
15निज कक्षानुसार गोविंद राधे।
16श्रवण मनन आदि श्रेय हैं बता दे॥ 10018॥
17कामरहित शिशु गोविंद राधे।
18नहिं जाने नर नारी मिलन बता दे॥ 10019॥
19ऐसे कामयुक्त व्यक्ति गोविंद राधे।
20नहिं जाने रास लीला तत्व बता दे॥ 10020॥
21याते भक्ति द्वारा पूर्व गोविंद राधे।
22बनो अधिकारी निष्काम बता दे॥ 10021॥
23योगारूढ़ भक्त ही है गोविंद राधे।
24रास लीला अधिकारी बता दे॥ 10022॥