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Radha Govind Geet Part 2

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

लीला माधुरी · पृष्ठ 858

Reading 356 of 452 · Source nos. 9999–10010 · Source PDF 361

1तेरी मेरी नाहीं बने गोविंद राधे।

2तू तो है निठुर बीच ही में धोखा दे॥ 9999॥

3जा जा जा जा जा रे जार गोविंद राधे।

4बहुत सताया तो सों बोलुँ ना बता दे॥ 10000॥

5जा जा जा रे हरजाई गोविंद राधे।

6तू तो प्यार करे छोड़े प्यारी को भुला दे॥ 10001॥

7जा जा जा रे हरजाई गोविंद राधे।

8मैं ऐसी वैसी नहिं जाल में फँसा दे॥ 10002॥

9जा जा जा रे ललिता मैं गोविंद राधे।

10ऐसी वैसी नहिं जाको पट्टी पढ़ा दे॥ 10003॥

11प्यार वार तू क्या जाने गोविंद राधे।

12प्यार करे छोड़े आगे जाय बिसरा दे॥ 10004॥

13आग का लगाना सीखा गोविंद राधे।

14आग का बुझाना क्यों ना सीखा बता दे॥ 10005॥

15गोपी बना दे मोहिं गोविंद राधे।

16गोपियों ते कह दूँगा कोउ गारी ना दे॥ 10006॥

17ब्रज गोपी प्रेम दे दे गोविंद राधे।

18दूध दही खिलवाऊँ कोउ छाछ ना दे॥ 10007॥

19चोरी छोड़ो कह दूँगा गोविंद राधे।

20सब गोपी दूध दही आपुहिं ला दे॥ 10008॥

21भागवत पुराण का तो गोविंद राधे।

22सार है दशम स्कन्ध बता दे॥ 10009॥

23दशम स्कन्ध का गोविंद राधे।

24रास पंचाध्यायी सार है बता दे॥ 10010॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 2 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers continue at 5902 and end at 11111. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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