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Radha Govind Geet Part 2

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

लीला माधुरी · पृष्ठ 856

Reading 354 of 452 · Source nos. 9975–9986 · Source PDF 359

1किन्तु श्रीकृष्ण का तो गोविंद राधे।

2प्रेम था भक्तों में खंडित बता दे॥ 9975॥

3याते कृष्ण गोपियों को गोविंद राधे।

4प्रेम का बदला न दे सके बता दे॥ 9976॥

5याही ते कृष्ण कहें गोविंद राधे।

6मैं हूँ तुम्हारा ऋणियाँ बता दे॥ 9977॥

7और भक्तों ते मेरा गोविंद राधे।

8ज्ञानानंद दान मोहिं उऋण करा दे॥ 9978॥

9किन्तु गोपी ऋण ते तो गोविंद राधे।

10युग युग में भी नहिं उऋण बता दे॥ 9979॥

11गोपीजन प्रेम ऐसा गोविंद राधे।

12आनन्दकंद ब्रह्म को भी रु ला दे॥ 9980॥

13कासों कहौं कौन माने गोविंद राधे।

14ब्रह्म को ब्रज गोपी विट सा बना दे॥ 9981॥

15कृष्ण आनन्दकन्द गोविंद राधे।

16गोपी कौन सुख दे देगी बता दे॥ 9982॥

17कृष्ण की कृपा है यह गोविंद राधे।

18जो भक्तदत्त सुख ले लें बता दे॥ 9983॥

19भक्त सुख लै के कृष्ण गोविंद राधे।

20करके अनन्त गुना दे दें बता दे॥ 9984॥

21धन्य प्रेम गोपीजन गोविंद राधे।

22गोबर का टीका श्याम गाल में लगा दे॥ 9985॥

23गोपी प्रेम महिमा गोविंद राधे।

24देखो श्यामहूँ को बिनु दाम नचा दे॥ 9986॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 2 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers continue at 5902 and end at 11111. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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