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Radha Govind Geet Part 2

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

लीला माधुरी · पृष्ठ 853

Reading 351 of 452 · Source nos. 9939–9950 · Source PDF 356

1राधा या गोपी रति गोविंद राधे।

2सम नहिं श्रीकृष्ण प्रेम बता दे॥ 9939॥

3कृष्ण का प्रेम तो गोविंद राधे।

4अगनित नर नारिन सों बता दे॥ 9940॥

5राधा या गोपी का गोविंद राधे।

6कृष्ण ही ते प्रेम अनन्य बता दे॥ 9941॥

7एक बार रास ते गोविंद राधे।

8कृष्ण हुये अन्तर्धान बता दे॥ 9942॥

9सब गोपियों को तजि गोविंद राधे।

10राधा को संग ले गये थे बता दे॥ 9943॥

11राधा ने कहा पिय गोविंद राधे।

12थकि गइ निज कंधे पै चढ़ा दे॥ 9944॥

13कन्धे पै चढ़ाते ही गोविंद राधे।

14राधा उर प्रेम वैचित्र्य बता दे॥ 9945॥

15राधा रो रो कर गोविंद राधे।

16पूछें पिय कित गये पिय ते बता दे॥ 9946॥

17जहाँ हो आ जाओ गोविंद राधे।

18तुम बिनु प्राण नहिं राखूँ बता दे॥ 9947॥

19इत रो रो ढूँढि ढूँढि गोविंद राधे।

20थकि गइँ गोपी कुंज कुंज में बता दे॥ 9948॥

21तब कृष्ण आये पै गोविंद राधे।

22चार भुजा ते विष्णु बनि के बता दे॥ 9949॥

23तब गोपियों ने कहा गोविंद राधे।

24यदि भगवान हो तो वर दो बता दे॥ 9950॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 2 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers continue at 5902 and end at 11111. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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