Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 852
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1छोटा शिशु रोये जो तो गोविंद राधे।
2नीले नीले पलने में शिशु को झुला दे॥ 9927॥
3छोटा शिशु रोये जो तो गोविंद राधे।
4नीलमणि गुन गन गा के सुला दे॥ 9928॥
5आगे पाछे दाँये बाँये गोविंद राधे।
6जित देखूँ नीलमणि मुसका दे॥ 9929॥
7जित देखूँ नीलमणि गोविंद राधे।
8है कोइ जग वाते पाछा छुड़ा दे॥ 9930॥
9नैनों में नीलमणि गोविंद राधे।
10याते सारा जग नीलमणिमय दिखा दे॥ 9931॥
11नैन परे किरकिरि गोविंद राधे।
12दिन नहिं चैन रैन सोवन ना दे॥ 9932॥
13सप्त वितस्ति हरि गोविंद राधे।
14नैन परे तब कितनी पीड़ा दे॥ 9933॥
15गोपी कभू तो रीझि गोविंद राधे।
16तनु श्याम भूषण वसन पिन्हा दे॥ 9934॥
17गोपी कभू तो खीझि गोविंद राधे।
18सिर श्याम बाल हूँ में धूलि लगा दे॥ 9935॥
19गोपी प्रेम सम नहिं गोविंद राधे।
20शास्त्र वेद और कोई साध्य बता दे॥ 9936॥
21गोपी प्रेम जैसा प्रेम गोविंद राधे।
22था है न होगा कभू सब को बता दे॥ 9937॥
23गोपीजन प्रेम जैसा गोविंद राधे।
24श्यामा श्याम प्रेम ही है सब को बता दे॥ 9938॥