Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 850
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1लाली कह हँसि माथे गोविंद राधे।
2लगा के अबीर काला टीका लगा दे॥ 9903॥
3लाली बने लाल सोचें गोविंद राधे।
4समय होत बलवान बता दे॥ 9904॥
5एक कह सुना तो था गोविंद राधे।
6यशुमति के भई छोरी बता दे॥ 9905॥
7उस छोरी को मारा गोविंद राधे।
8कंस ने कारागार में बता दे॥ 9906॥
9कहीं सोइ छोरी पुनि गोविंद राधे।
10बनि भूतिनी आई होरी में बता दे॥ 9907॥
11एक कह भाजो सब गोविंद राधे।
12न तु भूतिनी खाय सब को बता दे॥ 9908॥
13सब भाजीं निज घर गोविंद राधे।
14मिले लाली लाल दोउ कंठ बता दे॥ 9909॥
15दिव्य प्रेम रस ऐसा गोविंद राधे।
16शालिनी ब्रजांगना को कुलटा बना दे॥ 9910॥
17ब्रज गोपी रोम रोम गोविंद राधे।
18नीलमणि दिव्य रँग व्याप्त बता दे॥ 9911॥
19गल हार नीलमणि गोविंद राधे।
20आँखों में अंजन नीला लगा दे॥ 9912॥
21नीला लहँगा हो गोविंद राधे।
22नीली नीली सिर पै ओढ़नी ओढ़ा दे॥ 9913॥
23नीली नीली कंचुकी हो गोविंद राधे।
24नीलकमल का कुण्डल पहिरा दे॥ 9914॥