Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 848
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1कोउ पद अँगुरिन गोविंद राधे।
2कनकन बिछुवन भी पहिरा दे॥ 9879॥
3कोउ सखि दोउ पद गोविंद राधे।
4लाल मिहावरि सुघर लगा दे॥ 9880॥
5पुनि कह सखि याय गोविंद राधे।
6लै चलु स्वामिनि जू को दिखा दे॥ 9881॥
7लाली लखि कह आली गोविंद राधे।
8यह काकी है नारि बता दे॥ 9882॥
9बड़ भागी जाकी गोविंद राधे।
10ऐसी सुन्दर नारि बता दे॥ 9883॥
11लाली कह यह आली गोविंद राधे।
12नाचना जानती होगी बता दे॥ 9884॥
13सब सखि वाद्य वृंद गोविंद राधे।
14लै आओ याको नाच दिखा दे॥ 9885॥
15नाचि नाचि थकि गई गोविंद राधे।
16अब सब सखि मिलि चरण दबा दे॥ 9886॥
17सब सखि लाल को गोविंद राधे।
18लाल गुलाल ते लाल बना दे॥ 9887॥
19सब सखि लाल को गोविंद राधे।
20पिचकारिन रँग माहिं डुबा दे॥ 9888॥
21पुनि कह लाली अब गोविंद राधे।
22याको निज पति ढिग द्रुत पहुँचा दे॥ 9889॥
23सब कह होरी है गोविंद राधे।
24होरी है होरी है लाल खिझा दे॥ 9890॥