Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 847
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1कोउ सखि नाक नथ गोविंद राधे।
2महँ मोतिन की लर लगवा दे॥ 9867॥
3कोउ सखि नैनन गोविंद राधे।
4मनहर काजर सुघर लगा दे॥ 9868॥
5कोउ सखि नीले गाल गोविंद राधे।
6राग अरुणिमा लेप लगा दे॥ 9869॥
7कोउ सखि बीरी लै के गोविंद राधे।
8हँसि निज कर मुख पान खिला दे॥ 9870॥
9कोउ सखि चिबुक में गोविंद राधे।
10गोल गोल एक तिल बिन्दु रचा दे॥ 9871॥
11कोउ सखि कण्ठ में गोविंद राधे।
12मणि मोतिन को हार पिन्हा दे॥ 9872॥
13कोउ सखि किंकिनि गोविंद राधे।
14कनकन कटि तट झट पहिरा दे॥ 9873॥
15कोउ सखि दोउ कर गोविंद राधे।
16कंकन अरु करपत्र पिन्हा दे॥ 9874॥
17कोउ सखि दोउ कर गोविंद राधे।
18हरी हरी पीरी पीरी चूरी पहिरा दे॥ 9875॥
19कोउ कर अँगुरिन गोविंद राधे।
20रतन खचित मुँदरिन पहिरा दे॥ 9876॥
21कोउ सखि दोउ कर गोविंद राधे।
22मेहँदी बूटेदार रचा दे॥ 9877॥
23कोउ सखि दोउ पद गोविंद राधे।
24कनकन नूपुर भल पहिरा दे॥ 9878॥