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Radha Govind Geet Part 2

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

लीला माधुरी · पृष्ठ 846

Reading 344 of 452 · Source nos. 9855–9866 · Source PDF 349

1औचक सखिन सब गोविंद राधे।

2घेरि पकरि लइँ लाल को बता दे॥ 9855॥

3ललिता कही अलि गोविंद राधे।

4अब सब मिलि याय लाली बना दे॥ 9856॥

5पीताम्बर पै गोविंद राधे।

6लाली की नीली सारी पहिरा दे॥ 9857॥

7कोउ सखि मुरलिहिं गोविंद राधे।

8उर धरि तर कंचुकि पहिरा दे॥ 9858॥

9कोउ सखि सिर पै गोविंद राधे।

10जरिन किनारिन चुनरी ओढ़ा दे॥ 9859॥

11कोउ सखि माँग महँ गोविंद राधे।

12लाल लाल सिंदूर लगा दे॥ 9860॥

13कोउ सखि बालों की गोविंद राधे।

14पुष्प माला युत वेणी गुहा दे॥ 9861॥

15कोउ सखि सिर पै गोविंद राधे।

16सुघर चन्द्रिका चारु बँधा दे॥ 9862॥

17कोउ चन्द्रिकहिं गोविंद राधे।

18मोतिन लर शृंगार करा दे॥ 9863॥

19कोउ सखि भाल में गोविंद राधे।

20लाल लाल बिन्दी भी लगा दे॥ 9864॥

21कोउ सखि कान महँ गोविंद राधे।

22रतन खचित कुण्डल पहिरा दे॥ 9865॥

23कोउ सखि नाक महँ गोविंद राधे।

24भल नथ अरु बेसर पहिरा दे॥ 9866॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 2 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers continue at 5902 and end at 11111. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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