Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 841
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1सखियाँ मलार गावें गोविंद राधे।
2बारी बारी ते झुलावें बता दे॥ 9795॥
3इतने में लाली कह गोविंद राधे।
4लाल तुम झूला झुलावो बता दे॥ 9796॥
5लाली अकेली बैठीं गोविंद राधे।
6लाल झुलावें झूला बता दे॥ 9797॥
7लाल ने झोंटा दीनो गोविंद राधे।
8जोर ते लाली कह बस बस बता दे॥ 9798॥
9सखि बोलीं पुनि कालि गोविंद राधे।
10झूलन पधारो पिय प्यारी बता दे॥ 9799॥
11फागुन आया सखि गोविंद राधे।
12भागन भाग न होरी ते बता दे॥ 9800॥
13होरी न खेले जो री गोविंद राधे।
14गोरी सब मिलि होरी रंग में डुबा दे॥ 9801॥
15लाल गुलालन गोविंद राधे।
16कारी कारी छोरी को भी गोरी बना दे॥ 9802॥
17होरी कारी गोरी गोरी गोविंद राधे।
18सब को ही लाल रंग गोरी बना दे॥ 9803॥
19होरी तो छोरी को गोविंद राधे।
20छोरा अरु छोरा को छोरी बना दे॥ 9804॥
21ऐसा रंग डारो श्याम गोविंद राधे।
22तनु ही न मन श्याम रंग में डुबा दे॥ 9805॥
23तनु रंग छूटे धोये गोविंद राधे।
24श्याम रंग छूटे ना मन का बता दे॥ 9806॥