Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 839
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1वेगि मिलवाय मोहिं गोविंद राधे।
2लै चलु महल के भीतर बता दे॥ 9771॥
3श्री जू ने श्यामा को गोविंद राधे।
4देखा अनूप रूप वारी बता दे॥ 9772॥
5श्री जू ने पूछा तू गोविंद राधे।
6कैसे आई इतै नेकु बता दे॥ 9773॥
7श्यामा कह श्यामा सों गोविंद राधे।
8जब ते लखा छलबलिया बता दे॥ 9774॥
9तब ते ना कल पल गोविंद राधे।
10विकल नैन झरें झर झर बता दे॥ 9775॥
11जित देखूँ तित गोविंद राधे।
12सोइ दीखे मुसकात बता दे॥ 9776॥
13लोक वेद मर्याद गोविंद राधे।
14तजि दइ ह्वै गइ बावरी बता दे॥ 9777॥
15श्री जू बोलीं सखि गोविंद राधे।
16भूलि जा वा नटखट को बता दे॥ 9778॥
17जो भी देखा था गोविंद राधे।
18मानि सपना वाय मन ते भुला दे॥ 9779॥
19श्यामा सखी बोली गोविंद राधे।
20प्रिया जू मन नहिं हाथ बता दे॥ 9780॥
21भूलना असम्भव गोविंद राधे।
22प्राण त्यागना संभव है बता दे॥ 9781॥
23श्री जू बोलीं सखि गोविंद राधे।
24याकी है औषधि एक ही बता दे॥ 9782॥