Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 838
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1मोको नहिं झूलना है गोविंद राधे।
2जा तू ही झूल गलबँहियाँ दे॥ 9759॥
3सखी गइ लाल ढिग गोविंद राधे।
4कहा लाली ने किया मान बता दे॥ 9760॥
5याको है उपाय एक गोविंद राधे।
6तुम बनि जावो श्यामा बता दे॥ 9761॥
7श्यामा को रूप धरि गोविंद राधे।
8जावो मनाने महल बता दे॥ 9762॥
9श्यामा महल द्वार गोविंद राधे।
10सखी ते कर जोरि बोली बता दे॥ 9763॥
11बहुत प्रशंसा सुनी गोविंद राधे।
12याते आई प्रिया पास बता दे॥ 9764॥
13प्रिया ते मिला दे सखि गोविंद राधे।
14मानूँगी तेरो आभार बता दे॥ 9765॥
15तू जो कहेगी सोई गोविंद राधे।
16करूँगी यह सत्य वचन बता दे॥ 9766॥
17सखी कह तू तो श्यामा गोविंद राधे।
18लगे स्वर्ग की कोई अप्सरा बता दे॥ 9767॥
19तोको तो लखि जग गोविंद राधे।
20ऐसो न कोई जो न मोहे बता दे॥ 9768॥
21श्यामा बोली सखि गोविंद राधे।
22यह सब बकवास बंद कर बता दे॥ 9769॥
23मोको तो प्रिया जू ते गोविंद राधे।
24मिले बिनु एक पल कल ना बता दे॥ 9770॥