Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 836
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1चुप ही रहो लाल गोविंद राधे।
2न तु सब पोल खोल दूँगी बता दे॥ 9735॥
3लाल जू बोले पोल गोविंद राधे।
4है ही नहीं का खोले बता दे॥ 9736॥
5अच्छा सुनो लाल गोविंद राधे।
6मन ते तुम भी चाहो बता दे॥ 9737॥
7चाह यह मैं भी गोविंद राधे।
8बननो चाहूँ गोरो बता दे॥ 9738॥
9श्याम रंग की तो गोविंद राधे।
10करो तुम झूठी प्रशंसा बता दे॥ 9739॥
11तुम मिठबोलनो गोविंद राधे।
12कोकिल सो तनु कारो बता दे॥ 9740॥
13तुम्हरो दोष नाहीं गोविंद राधे।
14यह करतूत तो विधि की बता दे॥ 9741॥
15ललिता की बात सुनि गोविंद राधे।
16प्यारी जू पुनि लगीं हँसने बता दे॥ 9742॥
17लाल ने पूछा लाली गोविंद राधे।
18हौं तो को कैसो लगो हौं बता दे॥ 9743॥
19लाली ने कहा तुम गोविंद राधे।
20कोटि काम कमनीय लागो बता दे॥ 9744॥
21लाली कह तो पै गोविंद राधे।
22कोटि कोटि गोरी दउँ वारि बता दे॥ 9745॥
23यह सुनि श्याम हँसे गोविंद राधे।
24अँगुठा दिखाया सखी को बता दे॥ 9746॥