Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 826
Reading 324 of 452 · Source nos. 9615–9626 · Source PDF 329
1स्वयं चातुरी भी गोविंद राधे।
2जड़ जनु चित्रलिखी दीखे बता दे॥ 9615॥
3स्वयं चंचलता गोविंद राधे।
4लखे प्रिया दृग चपल बता दे॥ 9616॥
5स्वयं कोमलता गोविंद राधे।
6प्रिया तनु छूने को डरपे बता दे॥ 9617॥
7प्रिया की सब वस्तु गोविंद राधे।
8सत चित आनँद रूप बता दे॥ 9618॥
9याते न उपमान गोविंद राधे।
10प्राकृत जग में कतहूँ बता दे॥ 9619॥
11इतना ही जानो मानो गोविंद राधे।
12प्यारी सम हैं प्यारी बता दे॥ 9620॥
13एक दिन कुंज में गोविंद राधे।
14बैठे थे युगल गलबँहियाँ दे॥ 9621॥
15साथ थीं सखियाँ गोविंद राधे।
16ललिता विशाखा आदि बता दे॥ 9622॥
17प्रिया जू बोलीं सखि गोविंद राधे।
18सुनु सुनु हंस बोलि रहे हैं बता दे॥ 9623॥
19इमि कहि प्यारी जू गोविंद राधे।
20यमुना की ओर चलि परीं बता दे॥ 9624॥
21पाछे चलीं सखियाँ गोविंद राधे।
22सखिन के पाछे चले लाल जू बता दे॥ 9625॥
23यमुना के तट पै गोविंद राधे।
24गये लाली लाल सखियाँ बता दे॥ 9626॥