Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 825
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1इन्हीं चरणों को गोविंद राधे।
2श्याम बार बार हैं चूमते बता दे॥ 9603॥
3श्यामा के युगल चरण गोविंद राधे।
4श्याम के प्राणाधार बता दे॥ 9604॥
5अस्तु किया श्याम ने गोविंद राधे।
6नख शिख श्यामा शृंगार बता दे॥ 9605॥
7पुनि देखा नैनन गोविंद राधे।
8श्यामा को अति ध्यान ते बता दे॥ 9606॥
9स्तम्भ स्वेद कंप आदि गोविंद राधे।
10प्रकट भये सब भाव बता दे॥ 9607॥
11नारी शृंगार तो गोविंद राधे।
12सौन्दर्यवर्धन हेतु बता दे॥ 9608॥
13रूप रससिन्धु श्यामा गोविंद राधे।
14शृंगार क्यों किया प्रश्न है बता दे॥ 9609॥
15उत्तर है प्रिया अंग गोविंद राधे।
16ढाँपि राखें डूबें ना श्याम बता दे॥ 9610॥
17विश्व की सारी द्युति गोविंद राधे।
18श्यामा तनु द्युति सम नाहिं बता दे॥ 9611॥
19मूर्तिमान छवि भी है गोविंद राधे।
20प्रिया छवि आगे लज्जित बता दे॥ 9612॥
21ललित कलायें सब गोविंद राधे।
22लाली को ढुरावें चँवर बता दे॥ 9613॥
23सारे दिव्य गुण गण गोविंद राधे।
24लाली के आगे नत मस्तक बता दे॥ 9614॥