Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 824
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1नाना रत्नों के गोविंद राधे।
2मणियों के हार हैं गर में बता दे॥ 9591॥
3गोरी कलाई में गोविंद राधे।
4हरी हरी पीरी पीरी चुरियाँ बता दे॥ 9592॥
5करों में कनकन गोविंद राधे।
6करपत्र पहुँची ललित बता दे॥ 9593॥
7करतल मेहँदी के गोविंद राधे।
8रंग ते अनुरंजित हैं बता दे॥ 9594॥
9अँगुरिन मुँदरिन गोविंद राधे।
10लखि श्याम दृग चकाचौंध बता दे॥ 9595॥
11उदर की त्रिवली गोविंद राधे।
12रूप रस दिव्य गुण धारा बता दे॥ 9596॥
13क्षीण है कटि तट गोविंद राधे।
14पुष्ट सुढार जघन प्रान्त बता दे॥ 9597॥
15मणिमय किंकिनि की गोविंद राधे।
16झनकार मुरलिहिं तान लजा दे॥ 9598॥
17मणिमय नूपुर गोविंद राधे।
18धुनि सुनि रागिनि राग भुला दे॥ 9599॥
19अलक्तरंजित गोविंद राधे।
20प्रिया के चरण कमल हैं बता दे॥ 9600॥
21इन्हीं चरणों को गोविंद राधे।
22श्याम सहलाते सुख पाते बता दे॥ 9601॥
23इन्हीं चरणों को गोविंद राधे।
24श्याम निज उर ते लगाते बता दे॥ 9602॥