Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 827
Reading 325 of 452 · Source nos. 9627–9638 · Source PDF 330
1यमुना में हंस डोलें गोविंद राधे।
2मधुर मधुर बोल बोलें बता दे॥ 9627॥
3यमुना के निर्मल गोविंद राधे।
4जल में फूले कमल बता दे॥ 9628॥
5प्रिया लखें पंछिन गोविंद राधे।
6पंछिन देखें प्रिया को बता दे॥ 9629॥
7प्रिया जू बोलीं पिय गोविंद राधे।
8कैसो सुन्दर हंस बता दे॥ 9630॥
9आप तो नटवर गोविंद राधे।
10नट की कलान में निपुण बता दे॥ 9631॥
11बड़े बड़े असुरन गोविंद राधे।
12मार्यो याते बलवान भी बता दे॥ 9632॥
13आजु तो पिय आप गोविंद राधे।
14हंस को पकरि लै आवो बता दे॥ 9633॥
15लाल चले हंस को गोविंद राधे।
16पकरन अति चातुरी ते बता दे॥ 9634॥
17आगे आगे हंस भाजे गोविंद राधे।
18पाछे पाछे भाजें नटवर बता दे॥ 9635॥
19पकरि न पायो जब गोविंद राधे।
20तब खिसियायो मन में बता दे॥ 9636॥
21खीझि के हंस पै गोविंद राधे।
22डार्यो निज पीताम्बर बता दे॥ 9637॥
23पीताम्बर लै गोविंद राधे।
24उड़ि गयो हंस भयभीत बता दे॥ 9638॥