Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 821
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1कछु सखि लाला को गोविंद राधे।
2पकरि खरी भइँ दूर बता दे॥ 9555॥
3कछु सखि मैया ते गोविंद राधे।
4लगी थीं देने उराहनो बता दे॥ 9556॥
5मैया ने ध्यान ते गोविंद राधे।
6देखा कहा यह लाल ना बता दे॥ 9557॥
7तब तो भाजीं सब गोविंद राधे।
8लाली को संग लै घर को बता दे॥ 9558॥
9वृन्दावन कुंज में गोविंद राधे।
10बैठे श्यामा श्याम दोउ गलबँहियाँ दे॥ 9559॥
11श्याम ने सोचा मन गोविंद राधे।
12आज हैं प्रसन्न अति श्यामा बता दे॥ 9560॥
13याते हौं निज कर गोविंद राधे।
14करूँगो श्यामा सिंगार बता दे॥ 9561॥
15श्यामा ते कहा तब गोविंद राधे।
16सुन लो प्रार्थना श्यामा बता दे॥ 9562॥
17आजु हौं तिहारो गोविंद राधे।
18शृंगार करनो चाहूँ बता दे॥ 9563॥
19मेरी याचना को गोविंद राधे।
20कृपा करि के स्वीकारो बता दे॥ 9564॥
21श्यामा मुसुकाईं गोविंद राधे।
22मानो कहा स्वीकार है बता दे॥ 9565॥
23श्याम विभोर भये गोविंद राधे।
24भये तत्पर शृंगार में बता दे॥ 9566॥