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Radha Govind Geet Part 2

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

लीला माधुरी · पृष्ठ 820

Reading 318 of 452 · Source nos. 9543–9554 · Source PDF 323

1हाव भाव चाल ढाल गोविंद राधे।

2सब ही लँगर जैसी लाली को सिखा दे॥ 9543॥

3एक कंध लठिया गोविंद राधे।

4एक कंध कामरि सुघर धरा दे॥ 9544॥

5नटखटपना भी गोविंद राधे।

6लाल जैसा लाली को भी सिखा दे॥ 9545॥

7सिर पै पगरी गोविंद राधे।

8वक्ष में अँगरखा भी पहिरा दे॥ 9546॥

9तिरछी चितवनि गोविंद राधे।

10मुरि मुरि मुसकनि और सिखा दे॥ 9547॥

11अँखियन कजरा गोविंद राधे।

12दोउ कर गजरा सुमन पिन्हा दे॥ 9548॥

13जैसे लाल मैया को गोविंद राधे।

14क्रोधयुक्त लखि के डरपें बता दे॥ 9549॥

15ऐसे ही लाली को गोविंद राधे।

16डरने का अभ्यास करा दे॥ 9550॥

17एक सखि बोली सखि गोविंद राधे।

18और सब तो कर लोगी बता दे॥ 9551॥

19किन्तु गौर वर्ण को गोविंद राधे।

20कैसे दुरावोगी ये बता दे॥ 9552॥

21ललिता कहीं हँसि गोविंद राधे।

22तनु कस्तूरी लेप करा दे॥ 9553॥

23सब ने मिलि जुलि गोविंद राधे।

24किया नटवर शृंगार बता दे॥ 9554॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 2 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers continue at 5902 and end at 11111. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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