Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 819
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1इतने में आइ गईं गोविंद राधे।
2सैकरन सखियाँ और बता दे॥ 9531॥
3सब ने कही श्यामा गोविंद राधे।
4तुम बनि जावो लँगर बता दे॥ 9532॥
5कछु सखि कछु दूर गोविंद राधे।
6तो को लै पकरि बाँधि खरी हौं बता दे॥ 9533॥
7कछु सखि मैया सों गोविंद राधे।
8जाके कहें लखु गुन लँगर बता दे॥ 9534॥
9सखियाँ बोलीं हाँ हाँ गोविंद राधे।
10लाली को बनाओ लाला बता दे॥ 9535॥
11सिर पै मोरपंख गोविंद राधे।
12गर वैजन्ती माला पिन्हा दे॥ 9536॥
13कानों में कुण्डल गोविंद राधे।
14नासा नथ बेसर पहिरा दे॥ 9537॥
15गुंजमाल वनमाल गोविंद राधे।
16केसर तिलकहुँ भाल में लगा दे॥ 9538॥
17कंध दुकूल पट गोविंद राधे।
18पीताम्बर कटि तट पहिरा दे॥ 9539॥
19कटि में काछनी गोविंद राधे।
20कनक किंकिनी भी पहिरा दे॥ 9540॥
21कर में कंकन गोविंद राधे।
22इक कर मुरली भी पकरा दे॥ 9541॥
23पग में नूपुर गोविंद राधे।
24ललित त्रिभंगी रूप सिखा दे॥ 9542॥