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Radha Govind Geet Part 2

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

लीला माधुरी · पृष्ठ 812

Reading 310 of 452 · Source nos. 9447–9458 · Source PDF 315

1बनि गये साँवरी गोविंद राधे।

2किये सोरह शृंगार बता दे॥ 9447॥

3सुन्दर सुन्दर गोविंद राधे।

4भूषन तनु लिये पहिरि बता दे॥ 9448॥

5जेहि मग श्यामा जू गोविंद राधे।

6जाती थीं जल भरन बता दे॥ 9449॥

7सोई मग जाके गोविंद राधे।

8साँवरी भी खरी ह्वै गई बता दे॥ 9450॥

9इतने में श्यामा भी गोविंद राधे।

10आ पहुँचीं सखि संग बता दे॥ 9451॥

11श्यामा के शीश पै गोविंद राधे।

12कनक कलश शोभित था बता दे॥ 9452॥

13श्यामा लखि साँवरी को गोविंद राधे।

14मग में अकेली भईं चकित बता दे॥ 9453॥

15श्यामा ने कहा सखि गोविंद राधे।

16तू तो है विश्व सुन्दरी बता दे॥ 9454॥

17मग में अकेली ही गोविंद राधे।

18संग ना सहेली क्यों खरी है बता दे॥ 9455॥

19साँवरी न बोली कछु गोविंद राधे।

20खरी खरी लखे छवि लाड़ली बता दे॥ 9456॥

21ललिता कह लाली जू गोविंद राधे।

22साँवरी बड़े घर की दीखे बता दे॥ 9457॥

23हमने प्रथम बार गोविंद राधे।

24देखा है याय ब्रज में बता दे॥ 9458॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 2 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers continue at 5902 and end at 11111. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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