Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 811
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1याते दीन बनि जावो गोविंद राधे।
2चरण शरण श्यामा के बता दे॥ 9435॥
3निज सर्वस्व को भी गोविंद राधे।
4कर दो अर्पण चरण बता दे॥ 9436॥
5पुनि माँगो रूप रस गोविंद राधे।
6दान कृपामयी देंगी बता दे॥ 9437॥
7ललिता की बात मानि गोविंद राधे।
8श्याम गये श्यामा निकट बता दे॥ 9438॥
9श्यामा के चरण गहि गोविंद राधे।
10क्षमा माँग्यो माँग्यो रूप दान बता दे॥ 9439॥
11लाली ने क्षमा किया गोविंद राधे।
12लाल को लगाया उर ते बता दे॥ 9440॥
13पुनि नइ लीला हित गोविंद राधे।
14लाली लाल गये कुंज गलबँहियाँ दे॥ 9441॥
15धन्य धन्य गोपी जन गोविंद राधे।
16जिनके वशीभूत ब्रह्म बता दे॥ 9442॥
17जिनकी झलक हित गोविंद राधे।
18लालायित रहें योगी बता दे॥ 9443॥
19वे ही ब्रह्म श्रीकृष्ण गोविंद राधे।
20नाना रूप धरें भक्त हित बता दे॥ 9444॥
21गोपियों का मग रोकें गोविंद राधे।
22आपु जाके गारी खा के बता दे॥ 9445॥
23एक दिन भोर ही गोविंद राधे।
24घर ते चले छलबलिया बता दे॥ 9446॥