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Radha Govind Geet Part 2

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

लीला माधुरी · पृष्ठ 805

Reading 303 of 452 · Source nos. 9363–9374 · Source PDF 308

1किन्तु मैं उनको गोविंद राधे।

2नेकहुँ सुख नाय दे सकूँ बता दे॥ 9363॥

3यदि अनुकूल बनुँ गोविंद राधे।

4रस विवश बेसुध होंय बता दे॥ 9364॥

5यदि प्रतिकूल बनुँ गोविंद राधे।

6क्षण में हों अति विकल बता दे॥ 9365॥

7कहा करुँ कैसे करुँ गोविंद राधे।

8कछू समझ नाँय आवे बता दे॥ 9366॥

9प्रिया भइँ चिन्ता मग्न गोविंद राधे।

10नीचे को देखिबे लागीं बता दे॥ 9367॥

11दुखी ह्वै कियो मान गोविंद राधे।

12लाल ने जान लिया मान बता दे॥ 9368॥

13लाल जू विविध भाँति गोविंद राधे।

14लाली को मनावें लाली मानें ना बता दे॥ 9369॥

15ललिता सों बोले लाल गोविंद राधे।

16जा तू लाली को मनाय ला बता दे॥ 9370॥

17सखी बोली प्रिया जू गोविंद राधे।

18प्रियतम तो निरपराध हैं बता दे॥ 9371॥

19बेर बेर प्रियतम गोविंद राधे।

20चिबुक धरें कर झटकि दो बता दे॥ 9372॥

21समय असमय गोविंद राधे।

22तुम तो कछु न विचारो बता दे॥ 9373॥

23कछु भी ना बोलीं लाली गोविंद राधे।

24भौंह तानि पीठ करि बैठीं बता दे॥ 9374॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 2 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers continue at 5902 and end at 11111. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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