Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 803
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1जब लौं तजो न मान गोविंद राधे।
2तब लौं न छोडूँ तव चरण बता दे॥ 9339॥
3लाली ने पूछा क्यों रे गोविंद राधे।
4दर्पण के पाछे कौन थी बता दे॥ 9340॥
5लाल समझ गये गोविंद राधे।
6लाली भोरेपन को बता दे॥ 9341॥
7एक दर्पण लै के गोविंद राधे।
8लाली को दिखाया कहा आप थीं बता दे॥ 9342॥
9लाली भी समझ गइँ गोविंद राधे।
10अपनी भोली भूल को बता दे॥ 9343॥
11लाल निर्दोष लखि गोविंद राधे।
12लाली को आई करु णा बता दे॥ 9344॥
13लाली मुसकाईं गोविंद राधे।
14उर ते लगाईं लाल को बता दे॥ 9345॥
15सब अलि मिलि कहीं गोविंद राधे।
16जय हो जय बलिहार बता दे॥ 9346॥
17वृन्दावन महँ गोविंद राधे।
18ललित लता लवंग कुंज बता दे॥ 9347॥
19तहँ बैठे दोउ गोविंद राधे।
20लली लाल ललितादि संग बता दे॥ 9348॥
21शयन की बेला थी गोविंद राधे।
22शयन आरती गाई बता दे॥ 9349॥
23पुनि कहा सखियों ने गोविंद राधे।
24चलो दोउ शय्या भवन बता दे॥ 9350॥