Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 801
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1भौंरा ज्यों फूल फूल गोविंद राधे।
2रस ले तजे जाय अनत बता दे॥ 9315॥
3ऐसे ही छलिया भी गोविंद राधे।
4एक तजे एक भजे लजे ना बता दे॥ 9316॥
5इसकी बातों में गोविंद राधे।
6अब नाहिं आवेंगी लाड़ली बता दे॥ 9317॥
7मैंने ठान लिया गोविंद राधे।
8अब याय देखूँगी भी ना बता दे॥ 9318॥
9हँसना बोलना गोविंद राधे।
10आँखें मिलाना तो दूर बता दे॥ 9319॥
11याते तो दूर ही गोविंद राधे।
12रह कर रहूँगी सुखी मैं बता दे॥ 9320॥
13याते जा कह दे गोविंद राधे।
14अब कभु मो ढिग आये ना बता दे॥ 9321॥
15इतने में धीरे धीरे गोविंद राधे।
16आके लाल खरे भये पाछे बता दे॥ 9322॥
17लाल ने कहा लाली गोविंद राधे।
18आप तो जानें प्रीति रीति बता दे॥ 9323॥
19अतएव आपको गोविंद राधे।
20मान नाहिं देता शोभा बता दे॥ 9324॥
21आपको जिसने गोविंद राधे।
22दिया है तन मन प्राण बता दे॥ 9325॥
23उसके प्रति यह गोविंद राधे।
24मान अभिमान नहिं मान्य बता दे॥ 9326॥