Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 800
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1सिर नीचे कर जोरि गोविंद राधे।
2खरे भये मानिनी सामने बता दे॥ 9303॥
3क्षमा करो क्षमा करो गोविंद राधे।
4कहा धीरे धीरे लाल ने बता दे॥ 9304॥
5लाली ने सुना किन्तु गोविंद राधे।
6पीठ किया लाल की ओर बता दे॥ 9305॥
7इतने में ललिता गोविंद राधे।
8आ गइँ लाली के पास बता दे॥ 9306॥
9ललिता कह लाली गोविंद राधे।
10क्षमा दान लाल को दे दो बता दे॥ 9307॥
11लाली ने डाटि कहा गोविंद राधे।
12वो तो छलिन सरताज बता दे॥ 9308॥
13अरी सखि छलिया गोविंद राधे।
14बाहर ते ही करे प्यार बता दे॥ 9309॥
15वचन रचना में गोविंद राधे।
16परम चतुर सिरमोर बता दे॥ 9310॥
17प्रीति की रीति तो गोविंद राधे।
18जाने भी ना माने भी ना लाल बता दे॥ 9311॥
19प्रेमी का मन तो गोविंद राधे।
20होता है निश्छल शुद्ध बता दे॥ 9312॥
21याके तो रोम रोम गोविंद राधे।
22कूट कूट भरा है कपट बता दे॥ 9313॥
23भोरीभारिन को गोविंद राधे।
24जाने फँ साना प्रेमजाल में बता दे॥ 9314॥