Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 799
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1सखी की बात सुनि गोविंद राधे।
2लाली हुईं कछु द्रवित बता दे॥ 9291॥
3लाली द्रवित लखि गोविंद राधे।
4सखी भाजी भाजी गइ लाल पै बता दे॥ 9292॥
5सखि बोली लाल जू गोविंद राधे।
6आजु लाली मान महान बता दे॥ 9293॥
7ठोढ़ी पै कर धरि गोविंद राधे।
8बैठी हैं भौंह तानि बता दे॥ 9294॥
9मैंने मनाने में गोविंद राधे।
10कोई कसर नहिं छोड़ी बता दे॥ 9295॥
11किन्तु मैं फिर भी गोविंद राधे।
12सफल नहीं हुई लाल जू बता दे॥ 9296॥
13आपका दुख भी गोविंद राधे।
14बढ़ा चढ़ा के बताया बता दे॥ 9297॥
15रोयी गिड़गिड़ायी गोविंद राधे।
16क्षमा कर दो कहा प्रिया सों बता दे॥ 9298॥
17किन्तु आजु लाली ने गोविंद राधे।
18एकहूँ न सुनी ना बोलीं बता दे॥ 9299॥
19मेरा अनुमान है गोविंद राधे।
20आप जायें तो कदाचित् मानें बता दे॥ 9300॥
21आप की बातें तो गोविंद राधे।
22प्रिया को सुहाने लगी हैं बता दे॥ 9301॥
23सखी की बात सुनि गोविंद राधे।
24लाल जू गये ढिग लाली बता दे॥ 9302॥