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Radha Govind Geet Part 2

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

लीला माधुरी · पृष्ठ 798

Reading 296 of 452 · Source nos. 9279–9290 · Source PDF 301

1लाल तो केवल गोविंद राधे।

2टकटकी लगाये परखें बता दे॥ 9279॥

3पत्ता भी खरके तो गोविंद राधे।

4जानि तोहिं खरे हो जायें बता दे॥ 9280॥

5कोइ सखि आमती गोविंद राधे।

6देखें तो सोचें आईं प्रिया जू बता दे॥ 9281॥

7आपके आने के गोविंद राधे।

8जो भी हैं मार्ग उन्हें देखें बता दे॥ 9282॥

9पुनि धरें उर कर गोविंद राधे।

10कहें बार बार “हा प्यारी” बता दे॥ 9283॥

11ऐसे निज प्रेमी को गोविंद राधे।

12प्यारी जू जनि ठुकरावो बता दे॥ 9284॥

13तैलधारावत गोविंद राधे।

14लाल रटें राधे राधे बता दे॥ 9285॥

15आप के रूप के गोविंद राधे।

16चिन्तन में तन्मय हैं बता दे॥ 9286॥

17आप अब मान तजो गोविंद राधे।

18कृपा का स्वभाव जनि त्यागो बता दे॥ 9287॥

19अवढर दानी तुम गोविंद राधे।

20लाल को करो प्राण दान बता दे॥ 9288॥

21मेरी यह प्रार्थना है गोविंद राधे।

22मान लो आप मानिनी जू बता दे॥ 9289॥

23चल कर लाल जू को गोविंद राधे।

24भर लो अपनी भुजन बता दे॥ 9290॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 2 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers continue at 5902 and end at 11111. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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