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Radha Govind Geet Part 2

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

लीला माधुरी · पृष्ठ 797

Reading 295 of 452 · Source nos. 9267–9278 · Source PDF 300

1बार बार लाल जू गोविंद राधे।

2मूर्छित गिर रहे क्षिति पै बता दे॥ 9267॥

3हा प्यारी हा प्यारी गोविंद राधे।

4कहि कहि रोयें सतत बता दे॥ 9268॥

5उनके प्राणों का गोविंद राधे।

6आधार राधारानी बता दे॥ 9269॥

7मुकुट कहीं परो गोविंद राधे।

8मुरली कहीं गिरी परी है बता दे॥ 9270॥

9पीतपट कहीं परो गोविंद राधे।

10वनमाला कहीं गिरी परी है बता दे॥ 9271॥

11असन वसन आदि गोविंद राधे।

12लाल को लगें अग्नि ज्वाला बता दे॥ 9272॥

13सुख सामग्री को गोविंद राधे।

14इत उत फें कि रहे लाला बता दे॥ 9273॥

15जो जो वस्तु पूर्व में गोविंद राधे।

16प्रिय थी सदा ते लाल को बता दे॥ 9274॥

17वे सब वस्तुयें गोविंद राधे।

18तुम बिनु हैं दुखदायी बता दे॥ 9275॥

19जल बिनु मीन भला गोविंद राधे।

20कैसे जीवित रहेगी बता दे॥ 9276॥

21ऐसे ही तुम बिनु गोविंद राधे।

22लाल भी प्राण तजि देंगे बता दे॥ 9277॥

23प्रीति की रीति कोे गोविंद राधे।

24तुम तो भलीभाँति जानो बता दे॥ 9278॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 2 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers continue at 5902 and end at 11111. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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