Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 796
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1पुनि कह सखि सों गोविंद राधे।
2तुम अपराध पूछि आओ बता दे॥ 9255॥
3मैंने तो ऐसा कछु गोविंद राधे।
4किया नाहिं जासों रूठें बता दे॥ 9256॥
5मेरे प्राणों पै गोविंद राधे।
6बीत रही जो सो सखी जा बता दे॥ 9257॥
7प्यारी बिनु मैं तो गोविंद राधे।
8जी नाहिं सकता पल भी बता दे॥ 9258॥
9सखी ने लाल की गोविंद राधे।
10बात सुनी दशा भी देखी बता दे॥ 9259॥
11पुनि गइ सो सखी गोविंद राधे।
12मान कुंज मानिनी पास बता दे॥ 9260॥
13सखी को आते लखि गोविंद राधे।
14जानि गइँ लाली वाने भेजा बता दे॥ 9261॥
15क्रोध की मुद्रा में गोविंद राधे।
16देखा घूरि मानिनी ने बता दे॥ 9262॥
17मानिनी के नैन भौंह गोविंद राधे।
18शोभा अनुपम लगे थी बता दे॥ 9263॥
19सखी आई लाली पै गोविंद राधे।
20दीन बनि लोटी पग पै बता दे॥ 9264॥
21नम्रता पूर्वक गोविंद राधे।
22सखी ने कहा मानिनी ते बता दे॥ 9265॥
23आपके वियोग में गोविंद राधे।
24लाल की दशा देखी जाय ना बता दे॥ 9266॥